मुखियई के मचि गइल हल्ला,
लागल शिकारी चाल में ।

लेके दउरल चीखना चखना,
माछ फँसावे जाल में ।।

पांच बरिस जे बाति ना पूछल,
नियराइल तs आइल बा ।

उ जालि लोग बूझि गइल तs,
नाया जालि बुनाइल बा ।।

कउआ भी अब बोले लागल,
मिठकी कोयल के बोली ।

सियरा भी अब रोवाँ झारि के,
पेन्हले बा साड़ी चोली ।।

रोवे बिलरिया किरिया खाले,
मुसवन की लगे जाके ।

लोरे झोर भइल बा पपनी,
छोहे छाह छाती फाटे ।।

हाथ जोरेले पांव पड़ेले
पांवे पाँव लोटा जाले ।

उठेले त हाथ दाबि के
बोतल मासु थमा जाले ।।

जवन सेठ जेतने बा लूटले,
फेरु लूटे उ आवsता ।

दूसर के भी जगल जवानी,
लूटे खातिर धावsता ।।

बस चुनाव ले सभे बा आपन,
जहिया वोट डरा जाई ।

जइसे ही ई मोहर लगा दी,
मछरी रेति हता जाई ।।

सोचि समुझि के मोहर लगइह,
पइसा पर जो बिका जइबs ।

अबहीं का तू रोअले बाड़s,
पांच बरिस फेरु रोइबs ।।

सत्य प्रकाश शुक्ल बाबा